Saturday, 7 March 2020
Friday, 6 March 2020
Tuesday, 3 March 2020
हनुमान जी के इन मंत्रो का करें जाप, दूर हो जायेंगे सभी दोष, शत्रु होंगे पराजित!!
हनुमान जी के इन मंत्रो का करें जाप, दूर हो जायेंगे सभी दोष, शत्रु होंगे पराजित
जबलपुर। हनुमान जी को हिन्दू धर्म में बड़ा ही शुभ और मंगलकारी माना गया है। मंगलवार को इनका पूजन करना बहुत शुभफलदायी मन जाता है। मंगलवार के दिन कई देवी देवताओं की उपासना की जाती है, लेकिन आज के दिन खासकर हनुमान जी की उपासना की जाती है। जिनके आगे काल भी नत्मस्तक हो जाता है। हनुमान जी को रुद्र यानि शिव का अवतार माना गया है। कहते हैं कि मंगलवार के दिन हनुमानजी के 5 मंत्रों का उच्चारण करने से आपका मंगल दोष भी खत्म हो जाता है। अगर आप अपने जीवन में अमंगल को मंगल करने के लिए सभी कोशिशें कर चुके हैं और फिर भी कुछ ठीक नहीं हो रहा है तो आइये ज्योतिषाचार्य सचिनदेव महाराज से जानते हैं हनुमान जी के 5 मंत्रों को, जिनका जाप करने से आपके सारे अमंगल कार्य मंगल हो जाएंगे।
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श्रीहनुमान की उपासना से दूर होते हैं मंगल दोष-
ज्योतिष मान्यताओं में शिव अंश होने से मंगल के शुभ होने पर व्यक्ति समस्त सांसारिक सुखों को पाता है, किंतु अशुभ होने पर संतान, भूमि, धन, विवाह, पुत्र, विद्या, रोग आदि से जुड़ी पीड़ाओं का सामना करता है, यही कारण है कि मंगलवार के दिन मंगल दोष शांति का विशेष महत्व है।
पूजा के बाद श्री हनुमान के इन 5 असरदार मंत्रों का जप करें-
ॐ रूवीर्य समुद्भवाय नम: ॐ शान्ताय नम: ॐ तेजसे नम: ॐ प्रसन्नात्मने नम:ॐ शूराय नम:
इन 5 हनुमान मंत्रों के जप के बाद हनुमानजी और मंगल देव का ध्यान कर लाल चन्दन लगे लाल फूल और अक्षत लेकर श्रीहनुमान के चरणों में अर्पित करें। हनुमान जी की आरती कर मंगल दोष से रक्षा के लिए भगवान से प्रार्थना करें।
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यदि आपकी भी कोई मनोकामना है तो नीचे लिखे हनुमान मंत्र का जप विधि-विधान से करने पर आपकी हर मनोकामना पूरी हो जाएगी। मंत्र इस प्रकार है-
मंत्र :महाबलाय वीराय चिरंजिवीन उद्दते। हारिणे वज्र देहाय चोलंग्घितमहाव्यये।।
जप विधि : प्रति मंगलवार सुबह जल्दी उठकर सर्वप्रथम स्नान आदि नित्य कर्म से निवृत्त होकर साफ वस्त्र पहनें। इसके बाद हनुमानजी की पूजा करें और उन्हें सिंदूर तथा गुड़-चना चढ़ाएं। इसके बाद पूर्व दिशा की ओर मुख करके कुश का आसन ग्रहण करें। तत्पश्चात लाल चंदन की माला से ऊपर लिखे मंत्र का जप करें। इस मंत्र का प्रभाव आपको कुछ ही समय में दिखने लगेगा।
श्री हनुमान मूल मंत्र:
ॐ ह्रां ह्रीं ह्रं ह्रैं ह्रौं ह्रः॥
द्वादशाक्षर हनुमान मंत्र: हं हनुमते रुद्रात्मकाय हुं फट्।
फल: से इस मंत्र के बारे शास्त्रो में वर्णित हैं की यह मंत्र स्वतंत शिवजी ने श्रीकृष्ण को बताया और श्रीकृष्ण नें यह मंत्र अर्जुन को सिद्ध करवाया था जिसे अर्जुन ने चर-अचर जगत् को जीत लिया था।
कुंवारे भाई रहें सावधान, रक्षाबंधन का चंद्र ग्रहण कर सकता है ये असर
प्रेत बाधा दूर करे चमत्कारी हनुमान मंत्र- यदि इस मंत्र का जप विधि-विधान से किया जाए तो कुछ ही समय में ऊपरी बाधा का निवारण हो सकता है। यह हनुमान मंत्र इस प्रकार है-
मंत्र : हनुमन्नंजनी सुनो वायुपुत्र महाबल:। अकस्मादागतोत्पांत नाशयाशु नमोस्तुते।।
जप विधि :- स्वच्छ अवस्था में यानी स्नान आदि करने के बाद हनुमानजी की पूजा करें और उन्हें सिंदूर तथा गुड़-चना चढ़ाएं। इसके बाद पूर्व दिशा की ओर मुख करके कुश का आसन ग्रहण करें। तत्पश्चात लाल चंदन की माला से ऊपर लिखे मंत्र का जप करें। इस मंत्र का प्रभाव आपको कुछ ही समय में दिखने लगेगा।
मुसीबतों को दूर करने का मंत्र- श्री हनुमान की उपासना में आचरण व विचारों की पवित्रता के साथ अपनाना निर्भय और बेदाग जीवन का मंत्र भी माना गया है। नीचे बताई पूजा सामग्री और विशेष छोटे-पर असरदार हनुमान मंत्र से श्री हनुमान की उपासना आज करना न चूकें !
मंत्र : ऊँ हं हनुमंताय नम:।
जप विधि : स्नान के बाद श्री हनुमान मंदिर में जाकर श्री हनुमान की पूजा में केसर चंदन, अक्षत, लाल गुलाब के साथ अलावा विशेष रूप से चमेली का फूल आसान, किंतु अचूक हनुमान मंत्र के साथ अर्पित करें।इस मंत्र की 108 बार रुद्राक्ष की माला से जप भी संकटनाश में बहुत असरदार माने गए हैं। इसके साथ ही चमेली के तेल के साथ श्री हनुमान को सिंदूर चढ़ावें या चोला चढ़ाना भी शोक-पीड़ा मुक्ति की कामना के लिए मंगलकारी सिद्ध होगा। श्री हनुमान को यथाशक्ति भोग लगाकर गुग्गल धूप व गाय के घी के दीप से आरती करें व अक्षय सुख की कामना करें।
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इन मंत्रों में है आपार शक्ति
ॐ हनुमते नमः
ॐ वायु पुत्राय नमः
ॐ रुद्राय नमः
ॐ अजराय नमः
ॐ अमृत्यवे नमः
ॐ वीरवीराय नमः
ॐ वीराय नमः
ॐ निधिपतये नमः
ॐ वरदाय नमः
ॐ निरामयाय नमः
ॐ आरोग्यकर्त्रे नमः
Vaibhav Laxmi Mantra - माता लक्ष्मी की से चाहिए धन और वैभव तो करें इन मन्त्रों का जाप
श्रीहनुमान की उपासना से दूर होते हैं मंगल दोष-
ज्योतिष मान्यताओं में शिव अंश होने से मंगल के शुभ होने पर व्यक्ति समस्त सांसारिक सुखों को पाता है, किंतु अशुभ होने पर संतान, भूमि, धन, विवाह, पुत्र, विद्या, रोग आदि से जुड़ी पीड़ाओं का सामना करता है, यही कारण है कि मंगलवार के दिन मंगल दोष शांति का विशेष महत्व है।
पूजा के बाद श्री हनुमान के इन 5 असरदार मंत्रों का जप करें-
ॐ रूवीर्य समुद्भवाय नम: ॐ शान्ताय नम: ॐ तेजसे नम: ॐ प्रसन्नात्मने नम:ॐ शूराय नम:
इन 5 हनुमान मंत्रों के जप के बाद हनुमानजी और मंगल देव का ध्यान कर लाल चन्दन लगे लाल फूल और अक्षत लेकर श्रीहनुमान के चरणों में अर्पित करें। हनुमान जी की आरती कर मंगल दोष से रक्षा के लिए भगवान से प्रार्थना करें।
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यदि आपकी भी कोई मनोकामना है तो नीचे लिखे हनुमान मंत्र का जप विधि-विधान से करने पर आपकी हर मनोकामना पूरी हो जाएगी। मंत्र इस प्रकार है-
मंत्र :महाबलाय वीराय चिरंजिवीन उद्दते। हारिणे वज्र देहाय चोलंग्घितमहाव्यये।।
जप विधि : प्रति मंगलवार सुबह जल्दी उठकर सर्वप्रथम स्नान आदि नित्य कर्म से निवृत्त होकर साफ वस्त्र पहनें। इसके बाद हनुमानजी की पूजा करें और उन्हें सिंदूर तथा गुड़-चना चढ़ाएं। इसके बाद पूर्व दिशा की ओर मुख करके कुश का आसन ग्रहण करें। तत्पश्चात लाल चंदन की माला से ऊपर लिखे मंत्र का जप करें। इस मंत्र का प्रभाव आपको कुछ ही समय में दिखने लगेगा।
श्री हनुमान मूल मंत्र:
ॐ ह्रां ह्रीं ह्रं ह्रैं ह्रौं ह्रः॥
द्वादशाक्षर हनुमान मंत्र: हं हनुमते रुद्रात्मकाय हुं फट्।
फल: से इस मंत्र के बारे शास्त्रो में वर्णित हैं की यह मंत्र स्वतंत शिवजी ने श्रीकृष्ण को बताया और श्रीकृष्ण नें यह मंत्र अर्जुन को सिद्ध करवाया था जिसे अर्जुन ने चर-अचर जगत् को जीत लिया था।
कुंवारे भाई रहें सावधान, रक्षाबंधन का चंद्र ग्रहण कर सकता है ये असर
प्रेत बाधा दूर करे चमत्कारी हनुमान मंत्र- यदि इस मंत्र का जप विधि-विधान से किया जाए तो कुछ ही समय में ऊपरी बाधा का निवारण हो सकता है। यह हनुमान मंत्र इस प्रकार है-
मंत्र : हनुमन्नंजनी सुनो वायुपुत्र महाबल:। अकस्मादागतोत्पांत नाशयाशु नमोस्तुते।।
जप विधि :- स्वच्छ अवस्था में यानी स्नान आदि करने के बाद हनुमानजी की पूजा करें और उन्हें सिंदूर तथा गुड़-चना चढ़ाएं। इसके बाद पूर्व दिशा की ओर मुख करके कुश का आसन ग्रहण करें। तत्पश्चात लाल चंदन की माला से ऊपर लिखे मंत्र का जप करें। इस मंत्र का प्रभाव आपको कुछ ही समय में दिखने लगेगा।
मुसीबतों को दूर करने का मंत्र- श्री हनुमान की उपासना में आचरण व विचारों की पवित्रता के साथ अपनाना निर्भय और बेदाग जीवन का मंत्र भी माना गया है। नीचे बताई पूजा सामग्री और विशेष छोटे-पर असरदार हनुमान मंत्र से श्री हनुमान की उपासना आज करना न चूकें !
मंत्र : ऊँ हं हनुमंताय नम:।
जप विधि : स्नान के बाद श्री हनुमान मंदिर में जाकर श्री हनुमान की पूजा में केसर चंदन, अक्षत, लाल गुलाब के साथ अलावा विशेष रूप से चमेली का फूल आसान, किंतु अचूक हनुमान मंत्र के साथ अर्पित करें।इस मंत्र की 108 बार रुद्राक्ष की माला से जप भी संकटनाश में बहुत असरदार माने गए हैं। इसके साथ ही चमेली के तेल के साथ श्री हनुमान को सिंदूर चढ़ावें या चोला चढ़ाना भी शोक-पीड़ा मुक्ति की कामना के लिए मंगलकारी सिद्ध होगा। श्री हनुमान को यथाशक्ति भोग लगाकर गुग्गल धूप व गाय के घी के दीप से आरती करें व अक्षय सुख की कामना करें।
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ॐ हनुमते नमः
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ॐ रुद्राय नमः
ॐ अजराय नमः
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ॐ वीराय नमः
ॐ निधिपतये नमः
ॐ वरदाय नमः
ॐ निरामयाय नमः
ॐ आरोग्यकर्त्रे नमः
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Monday, 2 March 2020
Saturday, 29 February 2020
नक्षत्र
तारे हमारे सौर जगत् के भीतर नहीं है। ये सूर्य से बहुत दूर हैं और सूर्य की परिक्रमा न करने के कारण स्थिर जान पड़ते हैं—अर्थात् एक तारा दूसरे तारे से जिस ओर और जितनी दूर आज देखा जायगा उसी ओर और उतनी ही दूर पर सदा देखा जायगा। इस प्रकार ऐसे दो चार पास-पास रहनेवाले तारों की परस्पर स्थिति का ध्यान एक बार कर लेने से हम उन सबको दूसरी बार देखने से पहचान सकते हैं। पहचान के लिये यदि हम उन सब तारों के मिलने से जो आकार बने उसे निर्दिष्ट करके समूचे तारकपुंज का कोई नाम रख लें तो और भी सुभीता होगा। नक्षत्रों का विभाग इसीलिये और इसी प्रकार किया गया है।
चंद्रमा २७-२८ दिनों में पृथ्वी के चारों ओर घूम आता है। खगोल में यह भ्रमणपथ इन्हीं तारों के बीच से होकर गया हुआ जान पड़ता है। इसी पथ में पड़नेवाले तारों के अलग अलग दल बाँधकर एक एक तारकपुंज का नाम नक्षत्र रखा गया है। इस रीति से सारा पथ इन २७ नक्षत्रों में विभक्त होकर 'नक्षत्र चक्र' कहलाता है। नीचे तारों की संख्या और आकृति सहित २७ नक्षत्रों के नाम दिए जाते हैं—
| नक्षत्र | तारासंख्या | आकृति और पहचान |
|---|---|---|
| अश्विनी | ३ | घोड़ा |
| भरणी | ३ | त्रिकोण |
| कृत्तिका | ६ | अग्निशिखा |
| रोहिणी | ५ | गाड़ी |
| मृगशिरा | ३ | हरिणमस्तक वा विडालपद |
| आर्द्रा | १ | उज्वल |
| पुनर्वसु | ५ या ६ | धनुष या धर |
| पुष्य | १ वा ३ | माणिक्य वर्ण |
| अश्लेषा | ५ | कुत्ते की पूँछ वा कुलावचक्र |
| मघा | ५ | हल |
| पूर्वाफाल्गुनी | २ | खट्वाकार X उत्तर दक्षिण |
| उत्तराफाल्गुनी | २ | शय्याकारX उत्तर दक्षिण |
| हस्त | ५ | हाथ का पंजा |
| चित्रा | १ | मुक्तावत् उज्वल |
| स्वाती | १ | कुंकुं वर्ण |
| विशाखा | ५ व ६ | तोरण या माला |
| अनुराधा | ७ | सूप या जलधारा |
| ज्येष्ठा | ३ | सर्प या कुंडल |
| मुल | ९ या ११ | शंख या सिंह की पूँछ |
| पुर्वाषाढा | ४ | सूप या हाथी का दाँत |
| उत्तरषाढा | ४ | सूप |
| श्रवण | ३ | बाण या त्रिशूल |
| धनिष्ठा प्रवेश | ५ | मर्दल बाजा |
| शतभिषा | १०० | मंडलाकार |
| पूर्वभाद्रपद | २ | भारवत् या घंटाकार |
| उत्तरभाद्रपद | २ | दो मस्तक |
| रेवती | ३२ | मछली या मृदंग |
इन २७ नक्षत्रों के अतिरिक्त 'अभिजित्' नाम का एक और नक्षत्र पहले माना जाता था पर वह पूर्वाषाढ़ा के भीतर ही आ जाता है, इससे अब २७ ही नक्षत्र गिने जाते हैं। इन्हीं नक्षत्रों के नाम पर महीनों के नाम रखे गए हैं। महीने की पूर्णिमा को चंद्रमा जिस नक्षत्र पर रहेगा उस महीने का नाम उसी नक्षत्र के अनुसार होगा, जैसे कार्तिक की पूर्णिमा को चंद्रमा कृत्तिका वा रोहिणी नक्षत्र पर रहेगा, अग्रहायण की पूर्णिमा को मृगशिरा वा आर्दा पर; इसी प्रकार और समझिए।
Friday, 28 February 2020
Thursday, 27 February 2020
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