Monday, 9 March 2020

Rajyog in Kundli : राजयोग के होते हैं 32 प्रकार, आपकी कुंडली में कौन-सा है व‍िराजमान




Rajyog in Kundli, Raj Yog kya hai :

 ज्‍योतिष में कुल 32 प्रकार के राजयोग माने गए हैं,

 जो व्‍यक्‍त‍ि को सर्वोच्‍च प्रतिष्‍ठा प्रदान करते हैं।

 जानें इनके बारे में व‍िस्‍तार से

Rajyog in Kundli in Hindi, Kundali Ke Rajyog : जीवन में जहां कदम-कदम पर संघर्ष होता है, वहीं कुछ व्‍यक्‍ति कुंडली में ऐसे योग लेकर जन्‍म लेते हैं क‍ि उनकी पूरी जिंदगी आराम, शासन और ठाट से गुजरती है। ऐसे लोगों के लिए ही कहा जाता है क‍ि वे राजयोग के साथ पैदा हुए हैं। प्राय: ऐसे लोगों को धन की कमी नहीं होती और जहां भी वे कदम रखते हैं, सफलता उनके साथ चलती है। यही नहीं, इनका व्‍यक्‍त‍ित्‍व भी अत्‍यंत प्रभावशाली होता है और लोग उनके सम्‍मोहन में बंधते चले जाते हैं। 
ज्‍योतिषाचार्य सुजीत जी महाराज के अनुसार, सुख और समृद्धि के अलावा जिसके पास बहुत बड़ी सत्ता हो, शक्ति हो और जिसके आदेश का पालन लोग करते हों, वही एक प्रकार का राजयोग है। राजयोग सभी योगों का राजा है। जन्मकुंडली में राजयोग की विधिवत व्याख्या की गई है। वैसे ज्योतिष में कुल 32 प्रकार के राजयोग होते हैं। प्रायः ये 32 योग एक साथ किसी कुंडली में मिलते नहीं हैं ।यदि ये सभी मिल जाय तो जातक चक्रवर्ती विश्व विजयी राजा होता है।

Tuesday, 3 March 2020

हनुमान जी के इन मंत्रो का करें जाप, दूर हो जायेंगे सभी दोष, शत्रु होंगे पराजित!!


हनुमान जी के इन मंत्रो का करें जाप, दूर हो जायेंगे सभी दोष, शत्रु होंगे पराजित

जबलपुर। हनुमान जी को हिन्दू धर्म में बड़ा ही शुभ और मंगलकारी माना गया है। मंगलवार को इनका पूजन करना बहुत शुभफलदायी मन जाता है।  मंगलवार के दिन कई देवी देवताओं की उपासना की जाती है, लेकिन आज के दिन खासकर हनुमान जी की उपासना की जाती है। जिनके आगे काल भी नत्मस्तक हो जाता है। हनुमान जी को रुद्र यानि शिव का अवतार माना गया है। कहते हैं कि मंगलवार के दिन हनुमानजी के 5 मंत्रों का उच्चारण करने से आपका मंगल दोष भी खत्म हो जाता है। अगर आप अपने जीवन में अमंगल को मंगल करने के लिए सभी कोशिशें कर चुके हैं और फिर भी कुछ ठीक नहीं हो रहा है तो आइये ज्योतिषाचार्य सचिनदेव महाराज से जानते हैं हनुमान जी के 5 मंत्रों को, जिनका जाप करने से आपके सारे अमंगल कार्य मंगल हो जाएंगे।
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श्रीहनुमान की उपासना से दूर होते हैं मंगल दोष-
ज्योतिष मान्यताओं में शिव अंश होने से मंगल के शुभ होने पर व्यक्ति समस्त सांसारिक सुखों को पाता है, किंतु अशुभ होने पर संतान, भूमि, धन, विवाह, पुत्र, विद्या, रोग आदि से जुड़ी पीड़ाओं का सामना करता है, यही कारण है कि मंगलवार के दिन मंगल दोष शांति का विशेष महत्व है।
पूजा के बाद श्री हनुमान के इन 5 असरदार मंत्रों का जप करें-
ॐ रूवीर्य समुद्भवाय नम: ॐ शान्ताय नम: ॐ तेजसे नम: ॐ प्रसन्नात्मने नम:ॐ शूराय नम:
इन 5 हनुमान मंत्रों के जप के बाद हनुमानजी और मंगल देव का ध्यान कर लाल चन्दन लगे लाल फूल और अक्षत लेकर श्रीहनुमान के चरणों में अर्पित करें। हनुमान जी की आरती कर मंगल दोष से रक्षा के लिए भगवान से प्रार्थना करें।
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यदि आपकी भी कोई मनोकामना है तो नीचे लिखे हनुमान मंत्र का जप विधि-विधान से करने पर आपकी हर मनोकामना पूरी हो जाएगी। मंत्र इस प्रकार है-
मंत्र :महाबलाय वीराय चिरंजिवीन उद्दते। हारिणे वज्र देहाय चोलंग्घितमहाव्यये।।
जप विधि : प्रति मंगलवार सुबह जल्दी उठकर सर्वप्रथम स्नान आदि नित्य कर्म से निवृत्त होकर साफ वस्त्र पहनें। इसके बाद हनुमानजी की पूजा करें और उन्हें सिंदूर तथा गुड़-चना चढ़ाएं। इसके बाद पूर्व दिशा की ओर मुख करके कुश का आसन ग्रहण करें। तत्पश्चात लाल चंदन की माला से ऊपर लिखे मंत्र का जप करें। इस मंत्र का प्रभाव आपको कुछ ही समय में दिखने लगेगा।

श्री हनुमान मूल मंत्र:
ॐ ह्रां ह्रीं ह्रं ह्रैं ह्रौं ह्रः॥
द्वादशाक्षर हनुमान मंत्र: हं हनुमते रुद्रात्मकाय हुं फट्।
फल: से इस मंत्र के बारे शास्त्रो में वर्णित हैं की यह मंत्र स्वतंत शिवजी ने श्रीकृष्ण को बताया और श्रीकृष्ण नें यह मंत्र अर्जुन को सिद्ध करवाया था जिसे अर्जुन ने चर-अचर जगत् को जीत लिया था।
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प्रेत बाधा दूर करे चमत्कारी हनुमान मंत्र- यदि इस मंत्र का जप विधि-विधान से किया जाए तो कुछ ही समय में ऊपरी बाधा का निवारण हो सकता है। यह हनुमान मंत्र इस प्रकार है-
मंत्र : हनुमन्नंजनी सुनो वायुपुत्र महाबल:। अकस्मादागतोत्पांत नाशयाशु नमोस्तुते।।
जप विधि :- स्वच्छ अवस्था में यानी स्नान आदि करने के बाद हनुमानजी की पूजा करें और उन्हें सिंदूर तथा गुड़-चना चढ़ाएं। इसके बाद पूर्व दिशा की ओर मुख करके कुश का आसन ग्रहण करें। तत्पश्चात लाल चंदन की माला से ऊपर लिखे मंत्र का जप करें। इस मंत्र का प्रभाव आपको कुछ ही समय में दिखने लगेगा।
मुसीबतों को दूर करने का मंत्र- श्री हनुमान की उपासना में आचरण व विचारों की पवित्रता के साथ अपनाना निर्भय और बेदाग जीवन का मंत्र भी माना गया है। नीचे बताई पूजा सामग्री और विशेष छोटे-पर असरदार हनुमान मंत्र से श्री हनुमान की उपासना आज करना न चूकें !
मंत्र : ऊँ हं हनुमंताय नम:।
जप विधि : स्नान के बाद श्री हनुमान मंदिर में जाकर श्री हनुमान की पूजा में केसर चंदन, अक्षत, लाल गुलाब के साथ अलावा विशेष रूप से चमेली का फूल आसान, किंतु अचूक हनुमान मंत्र के साथ अर्पित करें।इस मंत्र की 108 बार रुद्राक्ष की माला से जप भी संकटनाश में बहुत असरदार माने गए हैं। इसके साथ ही चमेली के तेल के साथ श्री हनुमान को सिंदूर चढ़ावें या चोला चढ़ाना भी शोक-पीड़ा मुक्ति की कामना के लिए मंगलकारी सिद्ध होगा। श्री हनुमान को यथाशक्ति भोग लगाकर गुग्गल धूप व गाय के घी के दीप से आरती करें व अक्षय सुख की कामना करें।
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इन मंत्रों में है आपार शक्ति
ॐ हनुमते नमः
ॐ वायु पुत्राय नमः
ॐ रुद्राय नमः
ॐ अजराय नमः
ॐ अमृत्यवे नमः
ॐ वीरवीराय नमः
ॐ वीराय नमः
ॐ निधिपतये नमः
ॐ वरदाय नमः
ॐ निरामयाय नमः
ॐ आरोग्यकर्त्रे नमः
Accident cancel yantra


Kalsharpyogyantra

Kalsharpyogyantra

How to wear in Lokit 

''108 om namah shivay ''Every 11 Monday shiv mantra proof.
Wear in Gold this yantra.11 Monday 
Continue deep in cow milk.


Saturday, 29 February 2020

Gemstones & Birthstones



Gemstones
 & 
Birthstones
which figure wear stone 
information these chart.
Look to eye matching Rashi 

नक्षत्र

तारे हमारे सौर जगत् के भीतर नहीं है। ये सूर्य से बहुत दूर हैं और सूर्य की परिक्रमा न करने के कारण स्थिर जान पड़ते हैं—अर्थात् एक तारा दूसरे तारे से जिस ओर और जितनी दूर आज देखा जायगा उसी ओर और उतनी ही दूर पर सदा देखा जायगा। इस प्रकार ऐसे दो चार पास-पास रहनेवाले तारों की परस्पर स्थिति का ध्यान एक बार कर लेने से हम उन सबको दूसरी बार देखने से पहचान सकते हैं। पहचान के लिये यदि हम उन सब तारों के मिलने से जो आकार बने उसे निर्दिष्ट करके समूचे तारकपुंज का कोई नाम रख लें तो और भी सुभीता होगा। नक्षत्रों का विभाग इसीलिये और इसी प्रकार किया गया है।
चंद्रमा २७-२८ दिनों में पृथ्वी के चारों ओर घूम आता है। खगोल में यह भ्रमणपथ इन्हीं तारों के बीच से होकर गया हुआ जान पड़ता है। इसी पथ में पड़नेवाले तारों के अलग अलग दल बाँधकर एक एक तारकपुंज का नाम नक्षत्र रखा गया है। इस रीति से सारा पथ इन २७ नक्षत्रों में विभक्त होकर 'नक्षत्र चक्र' कहलाता है। नीचे तारों की संख्या और आकृति सहित २७ नक्षत्रों के नाम दिए जाते हैं—
नक्षत्रतारासंख्याआकृति और पहचान
अश्विनीघोड़ा
भरणीत्रिकोण
कृत्तिकाअग्निशिखा
रोहिणीगाड़ी
मृगशिराहरिणमस्तक वा विडालपद
आर्द्राउज्वल
पुनर्वसु५ या ६धनुष या धर
पुष्य१ वा ३माणिक्य वर्ण
अश्लेषाकुत्ते की पूँछ वा कुलावचक्र
मघाहल
पूर्वाफाल्गुनीखट्वाकार X उत्तर दक्षिण
उत्तराफाल्गुनीशय्याकारX उत्तर दक्षिण
हस्तहाथ का पंजा
चित्रामुक्तावत् उज्वल
स्वातीकुंकुं वर्ण
विशाखा५ व ६तोरण या माला
अनुराधासूप या जलधारा
ज्येष्ठासर्प या कुंडल
मुल९ या ११शंख या सिंह की पूँछ
पुर्वाषाढासूप या हाथी का दाँत
उत्तरषाढासूप
श्रवणबाण या त्रिशूल
धनिष्ठा प्रवेशमर्दल बाजा
शतभिषा१००मंडलाकार
पूर्वभाद्रपदभारवत् या घंटाकार
उत्तरभाद्रपददो मस्तक
रेवती३२मछली या मृदंग
इन २७ नक्षत्रों के अतिरिक्त 'अभिजित्' नाम का एक और नक्षत्र पहले माना जाता था पर वह पूर्वाषाढ़ा के भीतर ही आ जाता है, इससे अब २७ ही नक्षत्र गिने जाते हैं। इन्हीं नक्षत्रों के नाम पर महीनों के नाम रखे गए हैं। महीने की पूर्णिमा को चंद्रमा जिस नक्षत्र पर रहेगा उस महीने का नाम उसी नक्षत्र के अनुसार होगा, जैसे कार्तिक की पूर्णिमा को चंद्रमा कृत्तिका वा रोहिणी नक्षत्र पर रहेगा, अग्रहायण की पूर्णिमा को मृगशिरा वा आर्दा पर; इसी प्रकार और समझिए।

Friday, 28 February 2020

Awakening Chakras, Mudras & Mantras

Yoga Mudra  


                                                             

Heart Chakra / Third Eye Chakra

A Third Eye Chakra had written by Ravan 
only ravan for knowledge third eye
 
Heart Chakra had written by Ayuracharya  Rishimuni